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शाहजहांपुर केसः आज SIT से होगा चिन्मयानंद और छात्रा का सामना, ये सबूत खोलेंगे राज


Lucknow:

छात्रा से रेप के आरोप में जेल में सजा काट रहे बीजेपी नेता और पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद का आज एसआईटी से फिर आमना सामना होगा, और इसके साथ-साथ छात्रा भी एसआईटी के सामने होगी। मिली जानकारी के मुताबिक आवाज के नमूने के लिए दोनों को एसआईटी टीम लखनऊ लेकर गई है। वहीं इससे संबंधित अधिकारियों ने बताया कि चिन्मयानंद और छात्रा को अलग-अलग समय पर लखनऊ ले जाया गया है। वहीं चिन्मयानंद को शाहजहांपुर जेल सुबह तकरीबन 9 बजे लखनऊ ले जाया गया।

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क्यों जरूरत पड़ी आवाज मिलान की-

आपको बता दें कि चिन्मयानंद केस को लेकर दो मुकदमे दर्ज हैं। दोनों में मुकदमों में 5 आरोपी हैं। वहीं चिन्मयानंद दुराचार के आरोपी हैं। छात्रा, संजय, विक्रम और सचिन पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने के आरोपी हैं। दोनों ही मुकदमों में एक-दूसरे के खिलाफ 60 से अधिक वीडियो एक-दूसरे को दोषी ठहराए जाने के लिए एसआईटी को उपलब्ध कराए गए। पर दोनों ही पक्ष अपने वीडियो असली और विपक्षी के वीडियो फर्जी होने की बात कहते हैं। वहीं एसआईटी ने इन वीडियो को एफएसएल के पास सत्यापन के लिए भेजे थे। उसमें किसी प्रकार की मिक्सिंग या टैम्परिंग नहीं मिली। अब एसआईटी इन वीडियो में सुनी जा रही आवाजों की भी सैम्पलिंग कराकर मिलान कराएगी, ताकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आवाज के मिलान के मसले पर कोई पेंच ढीला न रह पाए।

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वीडियो में किसने और क्या कहा था?

संजय सिंह ने सबसे आखिरी में वायरल हुए वीडियो में छात्रा से कहा था कि तुम्ही ने कहा था कि सिम लाकर दो, जिद की थी तो सिम का जुगाड़ कर दिया। इस बीच वह कहता है कि शिमला में मैंने तुम्हारे लिए अंडा करी भी बना कर दी थी। यह बात वाकई संजय ने कही थी। वहीं संजय ने कहा था कि किसी के बाप में दम नहीं था जो सिम का जुगाड़ कर देता। उसने यह भी कहा था कि छात्रा के कहने पर ही उसने सिम की व्यवस्था की। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में आवाज सैम्पल लिए जाने के बाद जब मिलान होगा, तब सच सामने आ जाएगा।

वहीं सचिन सेंगर ने कहा था कि अगर सोनू भैय्या हाथ खींच लें तो क्या होगा। एक वीडियो में सोनू भैय्या वाली बात उसी तरह से लोगों में चर्चा का विषय बनी थी, जिस तरह से कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था फेमस हुआ था। दरअसल लोगों को लग रहा था कि छात्रा और उसके साथियों को कोई और सोनू भैय्या है जो संरक्षण देर रहा था। दरअसल सचिन ने अपने लिए ही वह डायलॉग बोला था, क्योंकि उसका नाम ही सोनू भैय्या भी है। आवाज अगर मिलती है तो सचिन के खिलाफ भी सबूत पुख्ता हो जाएगा।

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लैब ले जाने की अनुमति का विरोध क्यों किया वकीलों ने?

संजय सिंह, विक्रम सिंह और सचिन की ओर से उनके वकील प्रमोद तिवारी ने कहा कि एसआईटी ने कई चक्र में पूछताछ करने के बाद ही तीनों युवकों की गिरफ्तारी की गई थी। वहीं पुलिस अभिरक्षा रिमांड लेकर एसआईटी युवकों से कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद नहीं कर सकी। संजय की रिमांड के लिए दिया गया प्रार्थना पत्र गलत होने के कारण निरस्त कर दिया गया था। अधिवक्ता प्रमोद तिवारी ने कहा कि एसआईटी टीम लगातार युवकों को प्रताड़ित कर रही है। धाराएं सही नहीं लिखी गईं हैं। युवक 15 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रह चुके हैं। ऐसी स्थिति में विधिक प्रावधानों से परे जाकर युवकों को पुलिस अभिरक्षा में नहीं दिया जा सकता है। वकील ने अशोक कुमार प्रति हिमाचल प्रदेश राज्य 2011 सीआरएलजे 455 पर विश्वास प्रकट करते हुए, यह कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध साच्य गढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है और न ही उक्त इंकारी उसके विरुद्ध विचार में ली जाएगी।

मिस ए की ओर से अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि अभियुक्तगण से वीडियो पर कथित प्रकरण में कई घंटे पूछताछ की जा चुकी है। कोई नया तथ्य एसआईटी के द्वारा नहीं लाया गया है। 15 दिन की प्रथम रिमांड भी हो चुकी है। एसआईटी का प्रार्थना पत्र केवल परेशान करने के लिए है। वहीं कहा कि अभियुक्त व पीड़िता को साथ रखने में धारा 376-सी की पीड़िता होने के नाते दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने कांतीभाई देवसी भाई पटेल प्रति गुजरात राज्य का हवाला भी दिया और कहा कि प्रथम रिमांड की अवधि 15 दिन के बाद पुलिस अभिरक्षा रिमांड नहीं दिया जा सकता है।

सरकारी वकील ने कहा कि आवाज का मिलान सबके लिए हितकर-

राज्य सरकार की ओर से अभियोजन अधिकारी ने कहा है कि एसआईटी द्वारा की जा रही विवेचना के अनुक्रम में अभियुक्तगण के कथित वार्तालाप की रिकार्डिंग की जांच रिपार्ट एफएसएल से प्राप्त हो चुकी है। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार वीडियो रिकार्डिंग को टैम्पर्ड नहीं किया गया है। विवेचक ने याचना की है कि अभियुक्तगण की आवाज का नमूना लेकर वार्तालाप की रिकार्डिंग से मिलान कराया जाना साक्ष्य संकलन की दृष्टि से जरूरी है। कहा गया कि आवाजों का नमूना लिया जाना अभियुक्तगण और अभियोजन दोनों के लिए हितकर होगा। यदि अभियुक्तगण की आवाज का नमूला मेल खाता है तो यह न्यायहित में होगा और यदि यह मेल नहीं खाता है तो अभियुक्तगण के हितों की रक्षा करेगा।

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